छत्तीसगढ़ शासन पर उदासीन रवैय्या का आरोप लगाते हुए अपनी मांगों को लेकर 23 अक्टूबर से पुनः आंदोलन की शुरुवात कर दी।

 

छत्तीसगढ़ शासन पर उदासीन रवैय्या का आरोप लगाते हुए मांगों को लेकर 23 अक्टूबर से पुनः आंदोलन की शुरुवात कर दी है।बताना चाहेंगे कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिकाएं शासन को एक माह पूर्व 22 सितंबर 21 को ज्ञापन सौपकर सूचना देने के बाद भी कोई चर्चा और मांगों की पूर्ति नहीं होने के कारण सम्पूर्ण प्रदेश में प्रत्येक विकासखंड मुख्यालय मे एक लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ता सहायिकाएं 23 अक्टूबर को डीपीओ के माध्यम से राज्य शासन को ज्ञापन दिया है।इसी कड़ी में रायगढ़ ब्लॉक की सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओ ने महिला एवं बाल विकास विभाग के दफ्तर पहुंच कर डीपीओ को ज्ञापन दिया है।साथ ही उन्होंने यह चेतावनी भी दी है कि आनेवाले दिनों में शासकीय कार्य ठप करते हुए केंद्र को बंद रखा जाएगा।


आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने जानकारी दी कि छत्तीसगढ़ राज्य में एक लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिकाएं आठ सूत्रीय मांगो को लेकर 23 अक्टूबर को सभी ब्लाक में सड़क पर उतरे चुकी है वे मुख्यमंत्री के नाम से डीपीओ को ज्ञापन सौंप रही है और इसके बाद भी मांगें पूरी नही की जाती है तो आगे की रणनीति के तहत बड़ी लड़ाई चरणबद्ध लड़ेंगी।
संघर्ष का विस्तार करते हुए एक नवंबर छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस के दिन राज्य सरकार का एक बार फिर से ध्यानाकर्षण करते हुये अंतिम अवसर दिया जाएगा कि छत्तीसगढ़ समाज सेवा और शासन के काम में लगी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका महिलाएं आंदोलन करेंगी। प्रदेश की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका राज्य सरकार के वादा खिलाफी और केंद्र सरकार की उपेक्षापूर्ण रवैय्ये का पूर्ण विरोध कर रही है।उनका कहना है कि सरकार के पास ढाई साल का समय है इन ढाई सालों में यदि सरकार उनकी मांगों को पूरा नही करती है तो जमीनी स्तर पर कार्यरत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की नाराजगी का खामियाजा आगामी चुनाव में कांग्रेस सरकार को भुगतना पड़ सकता है।

 

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