मां मंगला इस्पात के ठेका श्रमिकों को मिलती है मात्र 230 रुपए की रोजाना मजदूरी, मजदूरों ने कंपनी के बाहर दिनभर मचाया हल्ला, प्रबन्धन ने सरकारी रेट पर मजदूरी देने का किया वादा, देखे वीडियो।

 

मां मंगला इस्पात के ठेका श्रमिकों को मिलती है मात्र 230 रुपए की रोजाना मजदूरी, मजदूरों ने कंपनी के बाहर दिनभर मचाया हल्ला, प्रबन्धन ने सरकारी रेट पर मजदूरी देने का किया वादा, देखे वीडियो।

रायगढ़, 25 नवंबर। 5 बरस से मजदूरी के रूप में मात्र 230 रुपए मिलने से बौखलाए श्रमिकों ने काम पर जाने की बजाए कंपनी गेट पर दिनभर जमकर हल्ला मचाया। शाम को जब कंपनी प्रबन्धन ने उन्हें सरकारी दर पर मजदूरी और अन्य सुविधाएं देने का वादा कर ठेकेदार को भी तड़ी दी, तब कहीं जाकर बवाल शांत हुआ।
जिला मुख्यालय से तकरीबन 25 किलोमीटर दूर सरहदी प्रान्त ओड़िशा से लगे ग्राम नटवरपुर में स्थित है मां मंगला इस्पात। इस कंपनी में काम करने जाने वाले ठेका श्रमिकों ने सरकार द्वारा निर्धारित मजदूरी दर से कम मिलने के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए खूब नारेबाजी की। कंपनी के मेन गेट के सामने जमीन में बैठकर विरोध प्रदर्शन करने वाले ठेका श्रमिकों का कहना था कि उनको पिछले 5 बरस से महज 230 रुपए रोजाना के हिसाब से मजदूरी भुगतान किया जाता है। जबकि, गवर्नमेंट रेट इससे ज्यादा है।
कामगारों ने कलेक्टर भीम सिंह के नाम आवेदन भी बनाकर रखा था, ताकि वे उसे प्रशासन को सौंपकर अपनी समस्या बता सके। ठेका श्रमिकों ने दिनभर मां मंगला इस्पात और ठेकेदार के खिलाफ आग उगलते हुए अपनी ऐसी भड़ास निकाली कि वातावरण में तनाव का जहर घुलते देख क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों को मोर्चा सम्हालना पड़ा। फिर क्या, लोकल नेताओं का समर्थन मिलते ही श्रमिकों का हौसला बढ़ने पर जब वे धरना प्रदर्शन को अनिश्चितकालीन करने का मन बनाने लगे तो अंततः कंपनी प्रबन्धन को उनसे मिलना पड़ा।
मां मंगला इस्पात के जीएम ने कंपनी कार्यालय में ठेका श्रमिकों के प्रतिनिधि मंडल और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों के साथ त्रि-पक्षीय बैठक करते हुए चर्चा की। श्रमिकों ने स्पष्ट रूप से कहा कि ठेकेदार उनको मजदूरी के रूप में प्रतिदिन सिर्फ 230 रुपए देता है, जो कि गलत है। साथ ही उनको मूलभूत सुविधाएं भी नहीं मिलती। तदुपरांत, कंपनी अधिकारी ने कहा कि अब से सभी श्रमिकों को रोजाना 300 के हिसाब से मजदूरी मिलेगी और सेफ्टी के लिए उनको जूते के साथ हेलमेट भी दी जाएगी। यही नहीं, कंपनी जीएम ने ठेकेदार को भी तलब कर साफ लहजे में चेताया कि अगर मजदूर हित को दरकिनार करने की फिर शिकायत मिली तो उसका बोरिया-बिस्तर लपेटकर उसकी जगह दूसरे ठेकेदार को जिम्मेदारी दी जाएगी। इसके बाद कंपनी से ठोस आश्वासन मिलने के बाद धरना दे रहे कामगारों ने अपना विरोध प्रदर्शन समाप्त कर लिया।

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